उफ़ ये इश्क
कितना बड़ गया
आसमान कम और, समंदर छोटा पड़ गया
तुम्हारी सादगी जीती
में अपना दिल हार गया
में तो रात भर जागता रहा
न जाने कब चांद गुजर गया
सुबह की फीकी चाय भी
मीठी लगने लगी
जो तुम्हारा ख्याल जहन को
छू कर गुज़र गया
इश्क बयां कर तो दूं लेकिन
कमबख्त ये पन्ना आज फिर छोटा पड़ गया
उफ़ ये इश्क
कितना बड़ गया
आसमान कम और
समंदर छोटा पड़ गया
Emotion, Connection, and Artistic Expression.
continue…